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विवाद करना और विवाद कराना ही इस फोरम का रुल है !


    शेर ओ शायरी

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    शेर  ओ शायरी  Empty शेर ओ शायरी

    Post by jalwa on Mon 01 Nov 2010, 12:49 am

    चेहरे पे बनावट का गुस्सा, आंखों से छलकता प्यार भी है
    इस शोख-ए-अदा को क्या कहिये, इनकार भी है इकरार भी है


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    शेर  ओ शायरी  Empty खुदा से

    Post by jalwa on Mon 01 Nov 2010, 12:50 am

    सुनते हैं की मिल जाती है हर चीज़ दुआ से
    इक रोज़ तुम्हे माँग के देखेंगे खुदा से


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    Post by jalwa on Mon 01 Nov 2010, 12:52 am

    एक बार जो बिखरी तो बिखर जायेगी
    जिन्दगी जुल्फ नहीं जो संवार जायेगी


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    शेर  ओ शायरी  Empty मुलाकात हो गयी

    Post by jalwa on Mon 01 Nov 2010, 12:53 am

    देखा जो तीर खाके कमींगाह की तरफ
    अपने ही दोस्तों से मुलाकात हो गयी


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    Post by jalwa on Mon 01 Nov 2010, 12:53 am

    तुम दूर खडे देखा ही किये और डूबने वाले डूब गए
    साहिल को जो मंजिल समझे वो लज्जत-ए-दरिया क्या जाने


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    Post by jalwa on Mon 01 Nov 2010, 12:54 am

    पत्थर के खुदा वहाँ भी पाए
    हम चाँद से आज लौट आये


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    Post by jalwa on Mon 01 Nov 2010, 12:58 am

    रंज से खूगर हुआ इन्साँ तो मिट जाता है रंज
    मुश्किलें मुझ पर पड़ी इतनी की आसां हो गयी -Ghalib


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    Post by jalwa on Mon 01 Nov 2010, 12:59 am

    कह रहा है मोज-ए-दरिया से समंदर का सुकूँ
    जिसमे जितना ज़र्फ़ है वो उतना ही खामोश है -Iqbal


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    Post by jalwa on Mon 01 Nov 2010, 1:00 am

    उम्र भर जलाता रहा इस दिल को खामोशी के साथ
    और शमा को इक रात की सोज़-ए-दिली पे नाज़
    था


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    Post by jalwa on Mon 01 Nov 2010, 1:03 am

    उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
    न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाये


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    Post by Don.One on Mon 01 Nov 2010, 1:05 am

    आखो की नूर है तू , जो हसरत से मिले वो फुल है तू ,
    इन आखो को कभी नम न होने देना , क्योकि इस दिल की हुर है तू !
    guitar


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    Post by jalwa on Mon 01 Nov 2010, 1:12 am

    यही हे जिंदगी कुछ ख़ाक चंद उम्मीदें
    इन्ही खिलोनों से तुम भी बहल सको तो
    चलो


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    Post by jalwa on Mon 01 Nov 2010, 2:00 am

    हमको भी हमराह लेते जाईये
    एक से अच्छा है दो का काफिला


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